‘बडी ब्रेसलेट’ कोलोरेक्टल कैंसर के बारे में जागरूकता फैलाता है | ‘Buddy Bracelet’ Spreads Awareness of Colorectal Cancer
प्रस्तावना
कैंसर आज की दुनिया में सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। विशेषकर कोलोरेक्टल कैंसर, जो पाचन तंत्र के एक अहम हिस्से – बड़ी आंत (Colon) और मलाशय (Rectum) – को प्रभावित करता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यह कैंसर समय पर पहचाना जाए तो लगभग 90 प्रतिशत तक रोका और उपचारित किया जा सकता है। इसके बावजूद, यह संयुक्त राज्य अमेरिका में कैंसर से होने वाली मौतों का दूसरा सबसे बड़ा कारण बना हुआ है।
यही कारण है कि कैंसर रिसर्च एंड प्रिवेंशन फाउंडेशन (Cancer Research & Prevention Foundation) और उसके 54 सहयोगियों ने वर्ष 2004 से एक विशेष पहल शुरू की – “बडी ब्रेसलेट अभियान”। इसका उद्देश्य है लोगों को प्रारंभिक पहचान, जांच (Screening) और रोकथाम के महत्व के प्रति जागरूक करना।
कोलोरेक्टल कैंसर: एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती
- अमेरिका ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में लाखों लोग इस रोग का शिकार होते हैं।
- भारत में भी इसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन अक्सर लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते।
- इसका सबसे बड़ा कारण है लक्षणों की अनदेखी और समय पर जांच न करवाना।
सामान्य लक्षण
- बार-बार दस्त या कब्ज़ रहना।
- मल में खून आना।
- पेट में लगातार दर्द या गैस की समस्या।
- अचानक वजन घटना।
- थकान और कमजोरी।
अक्सर लोग इन लक्षणों को साधारण पाचन समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही बीमारी को गंभीर बना देती है।
बडी ब्रेसलेट अभियान क्या है?
बडी ब्रेसलेट एक नीले रंग का ब्रेसलेट है, जिसे पहनकर लोग खुद को और दूसरों को कोलोरेक्टल कैंसर की जांच करवाने की याद दिलाते हैं।
इसका मूल सिद्धांत है –
“इसे पहनें, साझा करें, क्योंकि आपको परवाह है।”
यह कैसे काम करता है?
- कोई व्यक्ति बडी ब्रेसलेट पहनता है।
- वह अपनी जांच (Screening) करवाता है।
- इसके बाद वह ब्रेसलेट को किसी परिवारजन, मित्र या सहकर्मी को देता है।
- संदेश आगे बढ़ता है – “आपको भी जांच करवानी चाहिए।”
- यह सिलसिला चलता रहता है और जागरूकता फैलती रहती है।
जागरूकता का महत्व
कैरोलिन एल्डिगे, जो कैंसर रिसर्च एंड प्रिवेंशन फाउंडेशन की अध्यक्ष और संस्थापक हैं, कहती हैं –
“आज, रंग-बिरंगे ब्रेसलेट के बीच, नीला बडी ब्रेसलेट लोगों के लिए अपने स्वास्थ्य को अपने हाथों में लेने का एक चतुर तरीका प्रस्तुत करके सबसे अलग दिखता है। यह ब्रेसलेट यह संदेश फैलाता है कि कोलोरेक्टल कैंसर रोकथाम योग्य, उपचार योग्य और परास्त करने योग्य है।”
यह पहल लोगों को केवल जागरूक नहीं करती, बल्कि उन्हें अपने स्वास्थ्य की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित भी करती है।
रोकथाम और स्क्रीनिंग क्यों ज़रूरी है?
- औसत जोखिम वाले लोग – 50 वर्ष की आयु से स्क्रीनिंग शुरू करें।
- परिवारिक इतिहास वाले लोग – पहले से परामर्श लें और जल्दी जांच करवाएँ।
- स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ – संतुलित आहार, व्यायाम और धूम्रपान/शराब से दूरी बनाएँ।
अगर समय पर जांच की जाए, तो कैंसर प्रारंभिक चरण में ही पकड़ में आ सकता है और उसका इलाज बहुत सरल और प्रभावी हो सकता है।
भारत और विश्व में बडी ब्रेसलेट जैसे अभियानों की आवश्यकता
भारत जैसे देशों में, जहाँ लोग कैंसर की जांच से अक्सर कतराते हैं –
- सामाजिक झिझक
- डर और भ्रम
- अज्ञानता और लापरवाही
इन कारणों से कैंसर देर से पहचाना जाता है। यदि बडी ब्रेसलेट जैसी पहल भारत में भी व्यापक स्तर पर अपनाई जाए, तो लाखों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
सकारात्मक प्रभाव
- हजारों लोगों ने अपनी जांच समय पर करवाई।
- परिवार और दोस्तों के बीच स्वास्थ्य पर बातचीत बढ़ी।
- कैंसर के बारे में चुप्पी तोड़ी गई।
- “स्वास्थ्य के लिए मिलकर काम करने” की संस्कृति मजबूत हुई।
निष्कर्ष
कोलोरेक्टल कैंसर एक रोके जाने योग्य और इलाज योग्य बीमारी है।
‘बडी ब्रेसलेट’ अभियान ने यह साबित कर दिया है कि एक छोटा सा प्रतीक (ब्रेसलेट) भी लाखों जिंदगियों को छू सकता है और बदलाव ला सकता है।
यह न केवल जागरूकता फैलाता है, बल्कि हमें यह भी याद दिलाता है कि –
👉 स्वास्थ्य हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
👉 समय पर जांच = जीवन की सुरक्षा।
👉 साझा की गई जानकारी = बचाई गई जिंदगी।
इसलिए, अगली बार जब आप अपने स्वास्थ्य को टालने की सोचें, तो बडी ब्रेसलेट का संदेश याद रखें – “इसे पहनें, साझा करें, क्योंकि आपको परवाह है।”
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
प्रश्न 1: कोलोरेक्टल कैंसर क्या है?
उत्तर: यह बड़ी आंत (Colon) और मलाशय (Rectum) में होने वाला कैंसर है, जो पाचन तंत्र को प्रभावित करता है।
प्रश्न 2: बडी ब्रेसलेट क्या है?
उत्तर: यह एक नीला ब्रेसलेट है जो कोलोरेक्टल कैंसर की जांच और जागरूकता का प्रतीक है।
प्रश्न 3: किस उम्र से स्क्रीनिंग करवानी चाहिए?
उत्तर: औसत जोखिम वाले लोगों को 50 वर्ष की उम्र से स्क्रीनिंग करवानी चाहिए। जिनके परिवार में कैंसर का इतिहास है, उन्हें इससे पहले शुरू करना चाहिए।
प्रश्न 4: कोलोरेक्टल कैंसर के लक्षण क्या हैं?
उत्तर: बार-बार कब्ज़ या दस्त, मल में खून, पेट में दर्द, अचानक वजन घटना और थकान इसके मुख्य लक्षण हैं।
प्रश्न 5: क्या यह कैंसर पूरी तरह से रोका जा सकता है?
उत्तर: हाँ, समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से इसे 90 प्रतिशत तक रोका और इलाज किया जा सकता है।
प्रश्न 6: भारत में इसकी जागरूकता क्यों ज़रूरी है?
उत्तर: भारत में लोग स्वास्थ्य जांच से अक्सर कतराते हैं। जागरूकता बढ़ने से कैंसर समय पर पकड़ा जाएगा और अधिक लोगों की जान बच सकेगी।