4 Stages of Eclampsia | एक्लैम्पसिया के 4 चरण
परिचय
गर्भावस्था स्वयं में एक चुनौतीपूर्ण अवस्था है, लेकिन कुछ जटिलताएँ इसे और भी गंभीर बना देती हैं। ऐसी ही एक गंभीर अवस्था है प्री-एक्लैम्पसिया और इसका उन्नत रूप एक्लैम्पसिया।
प्री-एक्लैम्पसिया एक गर्भावस्था संबंधी विकार है, जिसमें उच्च रक्तचाप और ऐंठन जैसी समस्याएँ होती हैं। यह आमतौर पर गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद, विशेष रूप से पहले बच्चे के दौरान, विकसित होता है। यदि इसका समय पर उपचार न किया जाए, तो यह एक्लैम्पसिया में बदल सकता है, जो प्रसव से पहले, दौरान या बाद में हो सकता है और माँ व शिशु, दोनों के लिए जानलेवा हो सकता है।
एक्लैम्पसिया ऐंठन के 4 चरण
चरण 1 – प्रारंभिक संकेत
- आँखों का घूमना
- हाथ और चेहरे की मांसपेशियों का हल्का फड़कना
- इस चरण में महिला अक्सर होश में होती है, इसलिए लक्षण अनदेखे रह सकते हैं।
चरण 2 – मांसपेशियों का अकड़ना
- दाँत भींचना
- हाथ-पैर अकड़ जाना
- जीभ काट लेना
- चेहरे और हाथ की मांसपेशियों का सिकुड़ना
- लगभग 30 सेकंड तक सांस लेने में कठिनाई
चरण 3 – गंभीर ऐंठन
- मांसपेशियों का तेज़ और अनियंत्रित फड़कना
- झागदार व हल्का खून मिला लार निकलना
- ऐंठन लगभग 2 मिनट तक चल सकती है
- ऐंठन के बाद कोमा या दिल का दौरा पड़ने की संभावना
चरण 4 – गहरी बेहोशी
- अगर महिला जीवित रहती है, तो गहरी बेहोशी में चली जाती है
- यह स्थिति कई घंटों तक रह सकती है या शीघ्र समाप्त हो सकती है
निष्कर्ष (नकारात्मक चेतावनी भाव)
एक्लैम्पसिया एक अत्यंत खतरनाक अवस्था है, जिसे किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि गर्भवती महिला में उपरोक्त में से कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। देरी न केवल माँ की जान को खतरे में डालती है, बल्कि शिशु के जीवन को भी जोखिम में डाल सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: क्या एक्लैम्पसिया का इलाज संभव है?
हाँ, समय पर चिकित्सकीय देखभाल और सही दवा से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। अक्सर अस्पताल में भर्ती और मॉनिटरिंग की आवश्यकता होती है।
Q2: क्या प्री-एक्लैम्पसिया और एक्लैम्पसिया एक ही हैं?
नहीं, प्री-एक्लैम्पसिया एक प्रारंभिक अवस्था है, जबकि एक्लैम्पसिया उसका उन्नत और अधिक खतरनाक रूप है जिसमें दौरे आते हैं।
Q3: क्या एक्लैम्पसिया से बच्चे को नुकसान हो सकता है?
हाँ, समय पर इलाज न मिलने पर समय से पहले प्रसव, कम वजन या मृत जन्म का खतरा होता है।
Q4: क्या एक्लैम्पसिया को रोका जा सकता है?
पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन नियमित गर्भावस्था जांच, रक्तचाप की निगरानी और डॉक्टर की सलाह से जोखिम को कम किया जा सकता है।
Q5: एक्लैम्पसिया किस अवधि में सबसे अधिक होता है?
यह आमतौर पर गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद, प्रसव के दौरान या प्रसव के 48 घंटों के भीतर हो सकता है।