3 Things To Watch Out For With Debt Consolidation Services Online | ऑनलाइन ऋण समेकन सेवाओं के साथ ध्यान रखने योग्य 3 बातें
परिचय
आज के समय में बहुत से लोग अलग-अलग बैंकों या फाइनेंस कंपनियों से लोन लेते हैं—जैसे कि पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड का बकाया, कार लोन, होम लोन आदि। समय पर किस्तें न भर पाने या ब्याज की दर ज़्यादा होने पर, लोग एक आसान समाधान की तलाश करते हैं। इसी खोज में Debt Consolidation Services का नाम आता है।
डेब्ट कंसॉलिडेशन का मतलब है — आपकी सभी देनदारियां (loans/credit card bills) को एक जगह जोड़कर एक ही लोन में बदल देना, ताकि आप एक ही EMI में चुका सकें। यह तरीका कई बार फायदेमंद साबित होता है, लेकिन अगर ऑनलाइन सर्विस का चुनाव गलत हो जाए तो यह मुश्किल भी बढ़ा सकता है।
इसलिए, आज हम आपको बताएंगे 3 ऐसी चीजें, जिनसे आपको Online Debt Consolidation सर्विस चुनते समय सावधान रहना चाहिए।
1. छिपी हुई फीस और चार्जेस (Hidden Fees and Charges)
क्या है छिपी हुई फीस?
कई ऑनलाइन डेब्ट कंसॉलिडेशन कंपनियां शुरुआत में आपको कम ब्याज दर और आसान EMI का वादा करती हैं। लेकिन जब आप एग्रीमेंट पढ़ते हैं, तो उसमें छोटे अक्षरों (Fine Print) में कई तरह के हिडन चार्जेस लिखे होते हैं।
जैसे—
- प्रोसेसिंग फीस
- एकाउंट मेंटेनेंस फीस
- प्री-पेमेंट पेनल्टी
- लेट पेमेंट पेनल्टी
- कंसल्टेशन चार्ज
इनसे बचने का तरीका
- हमेशा टर्म्स एंड कंडीशंस ध्यान से पढ़ें।
- कंपनी से लिखित में सारे चार्जेस पूछें।
- सिर्फ विज्ञापन या वेबसाइट की बातों पर भरोसा न करें।
2. Fraud और Fake Websites (Fraud and Fake Websites)
ऑनलाइन धोखाधड़ी कैसे होती है?
आजकल कई फेक वेबसाइट्स और फ्रॉड कंपनियां खुद को “Debt Relief” या “Debt Consolidation” एक्सपर्ट बताती हैं। वे आपके पर्सनल डॉक्यूमेंट और बैंक डिटेल्स लेकर या तो लोन पास नहीं करतीं, या बीच में गायब हो जाती हैं।
कुछ कंपनियां:
- एडवांस फीस लेकर भाग जाती हैं।
- आपके लोन का ब्याज दर बढ़ा देती हैं।
- आपके क्रेडिट स्कोर को और खराब कर देती हैं।
सावधानी कैसे बरतें?
- कंपनी का रजिस्ट्रेशन नंबर और लाइसेंस जांचें।
- गूगल रिव्यू और सोशल मीडिया पर उनके कस्टमर फीडबैक पढ़ें।
- RBI या NBFC की List में उनका नाम देखें।
- कभी भी एडवांस पेमेंट न करें, जब तक ऑफिशियल डॉक्यूमेंट न मिल जाए।
3. शर्तें और ब्याज दर का जाल (Trap of Terms and High Interest Rates)
क्या है ब्याज दर का जाल?
बहुत सी Online Debt Consolidation कंपनियां शुरुआत में आपको कम ब्याज दर दिखाती हैं, लेकिन बाद में उसमें बदलाव कर देती हैं। जैसे:
- इंट्रोडक्टरी रेट केवल शुरुआती 6 महीने के लिए होती है।
- उसके बाद ब्याज दर अचानक बढ़ जाती है।
- EMI की राशि बढ़ने से आपकी मासिक बजट बिगड़ सकती है।
इनसे बचने का तरीका
- हमेशा फिक्स्ड रेट और फ्लोटिंग रेट का अंतर समझें।
- EMI और ब्याज दर को लिखित एग्रीमेंट में फाइनल कराएं।
- किसी भी बदलाव पर कंपनी की पॉलिसी को अच्छी तरह पढ़ें।
ऑनलाइन डेब्ट कंसॉलिडेशन सर्विस चुनते समय चेकलिस्ट
- कंपनी की ऑथेंटिसिटी चेक करें – रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस, रिव्यू देखें।
- सभी चार्जेस लिखित में लें – हिडन फीस से बचें।
- एग्रीमेंट ध्यान से पढ़ें – फाइन प्रिंट इग्नोर न करें।
- RBI/NBFC अप्रूवल – सिर्फ मान्यता प्राप्त कंपनी चुनें।
- एडवांस पेमेंट न करें – सिर्फ लोन अप्रूवल के बाद ही पेमेंट करें।
निष्कर्ष
ऑनलाइन डेब्ट कंसॉलिडेशन सर्विस आपकी वित्तीय परेशानी का हल हो सकती है, बशर्ते आप सावधानी बरतें। याद रखें, बिना रिसर्च किए किसी भी वेबसाइट या कंपनी को अपनी जानकारी और पैसे न सौंपें। अगर आप ऊपर बताई गई 3 सावधानियों को ध्यान में रखेंगे — छिपी हुई फीस से बचना, फेक वेबसाइट्स को पहचानना, और ब्याज दर के जाल में न फंसना — तो आप सुरक्षित और सही डेब्ट कंसॉलिडेशन सर्विस चुन पाएंगे।