Story of Raksha Bandhan, Why do We Celebrate Raksha Bandhan Festival
परिचय
भारत त्योहारों का देश है। यहां हर त्योहार के पीछे कोई न कोई ऐतिहासिक, धार्मिक या सांस्कृतिक कारण होता है। इन्हीं त्योहारों में से एक है रक्षाबंधन — भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और रक्षा के वचन का पर्व। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) बांधती है, और भाई उसकी रक्षा का संकल्प लेता है।
रक्षाबंधन केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा भावनात्मक रिश्ता है जो जीवनभर कायम रहता है।
रक्षाबंधन का अर्थ
“रक्षाबंधन” दो शब्दों से मिलकर बना है —
- “रक्षा” जिसका मतलब है सुरक्षा या बचाव
- “बंधन” जिसका मतलब है बंधन या संबंध
अर्थात यह एक ऐसा त्योहार है जिसमें रक्षा का बंधन बांधा जाता है। इसमें बहन, भाई को राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती है, और भाई वचन देता है कि वह हर परिस्थिति में बहन की रक्षा करेगा।
रक्षाबंधन का इतिहास और पौराणिक कथाएं
रक्षाबंधन का जिक्र केवल भारत में ही नहीं, बल्कि प्राचीन ग्रंथों, पुराणों और ऐतिहासिक घटनाओं में भी मिलता है। इसकी शुरुआत कब और कैसे हुई, इस बारे में कई कथाएं प्रसिद्ध हैं। आइए, इन्हें विस्तार से जानते हैं।
1. इंद्र और इंद्राणी की कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार देवताओं और असुरों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। असुरों के राजा बलि ने इंद्रलोक पर आक्रमण कर दिया। युद्ध में देवता कमजोर पड़ने लगे। ऐसे में इंद्र की पत्नी इंद्राणी ने एक रक्षा सूत्र बनाया और श्रावण मास की पूर्णिमा को इंद्र के हाथ पर बांधा। इस रक्षा सूत्र की शक्ति से इंद्र को युद्ध में विजय मिली। इसी घटना को रक्षाबंधन पर्व की एक उत्पत्ति माना जाता है।
2. श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कथा
महाभारत में भी रक्षाबंधन का उल्लेख मिलता है। कथा के अनुसार, एक बार श्रीकृष्ण को शिशुपाल के वध के दौरान हाथ में चोट लग गई और खून बहने लगा। उस समय द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर कृष्ण के हाथ में बांध दिया। बदले में श्रीकृष्ण ने वचन दिया कि वह हर संकट में द्रौपदी की रक्षा करेंगे। यही कारण है कि रक्षाबंधन को द्रौपदी और कृष्ण के रिश्ते से भी जोड़ा जाता है।
3. रानी कर्णावती और हुमायूं की कथा
मध्यकालीन इतिहास में भी रक्षाबंधन का उल्लेख मिलता है। चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने गुजरात के बहादुर शाह के आक्रमण से बचने के लिए मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजी। भाई के रूप में हुमायूं ने यह रक्षा का वचन स्वीकार किया और उनकी मदद के लिए सेना लेकर निकल पड़े। यह कहानी बताती है कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के बीच ही नहीं, बल्कि मित्रता और भाईचारे का प्रतीक भी है।
4. यम और यमुनाजी की कथा
किंवदंती के अनुसार, मृत्यु के देवता यम अपनी बहन यमुनाजी से मिलने बहुत कम जाते थे। एक बार यमुनाजी ने उन्हें अपने घर बुलाया और प्रेमपूर्वक भोजन कराया। इस अवसर पर यमुनाजी ने यम के हाथ में राखी बांधी और उनसे हमेशा मिलने का वचन लिया। यम ने खुशी में कहा कि जो भी इस दिन राखी बांधकर अपनी बहन की रक्षा करेगा, उसे लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलेगा।
रक्षाबंधन का धार्मिक महत्व
रक्षाबंधन केवल एक रस्म नहीं, बल्कि एक धार्मिक अनुष्ठान भी है। इस दिन:
- सुबह स्नान के बाद पूजा की जाती है।
- राखी को पूजा थाली में रखकर भगवान की आराधना की जाती है।
- बहन भाई को तिलक लगाकर राखी बांधती है और मिठाई खिलाती है।
- भाई उपहार या आशीर्वाद के रूप में बहन को प्रेम का प्रतीक देता है।
इस दिन का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह सावन मास की पूर्णिमा को आता है, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है।
रक्षाबंधन मनाने का सामाजिक महत्व
रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करता है। यह हमें यह सिखाता है कि:
- परिवार में प्रेम और एकता जरूरी है।
- बहनों की सुरक्षा और सम्मान भाई की जिम्मेदारी है।
- रिश्तों में विश्वास और समर्पण ही असली ताकत है।
आज के समय में यह त्योहार केवल रिश्तेदारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में भाईचारे और एकता का संदेश देता है।
रक्षाबंधन मनाने की परंपरा
रक्षाबंधन की परंपरा में अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग रीति-रिवाज हैं:
- उत्तर भारत में बहन भाई को राखी बांधती है और भाई उसे उपहार देता है।
- राजस्थान और गुजरात में “लूम्बा राखी” की परंपरा है, जिसमें शादीशुदा बहन अपने जीजा को भी राखी बांधती है।
- महाराष्ट्र में इसे “नारियल पूर्णिमा” के रूप में भी मनाया जाता है।
- दक्षिण भारत में इसे “अवनि अवित्तम” के नाम से ब्राह्मण समुदाय विशेष पूजा करता है।
आधुनिक समय में रक्षाबंधन
आज के समय में रक्षाबंधन का रूप बदल चुका है। पहले यह केवल घर के अंदर मनाया जाता था, लेकिन अब सोशल मीडिया और ऑनलाइन सुविधाओं के कारण बहनें दूर रहकर भी भाइयों को राखी भेज सकती हैं। ऑनलाइन गिफ्ट्स और डिजिटल कार्ड्स ने इस त्योहार को और आसान बना दिया है।
इसके अलावा, कई लोग रक्षाबंधन के दिन सैनिकों, मित्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी राखी बांधते हैं, जो हमारी सुरक्षा के लिए काम करते हैं।
रक्षाबंधन क्यों मनाते हैं?
संक्षेप में, रक्षाबंधन मनाने के मुख्य कारण हैं:
- भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करना।
- बहन की सुरक्षा का संकल्प लेना।
- परिवार में प्रेम, विश्वास और एकता बनाए रखना।
- पौराणिक और ऐतिहासिक परंपराओं को जीवित रखना।
- समाज में भाईचारे और आपसी सहयोग का संदेश फैलाना।
निष्कर्ष
रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि एक भावना है जो भाई-बहन के रिश्ते को और गहरा करती है। यह हमें यह याद दिलाता है कि चाहे समय कितना भी बदल जाए, रिश्तों का मूल्य और प्रेम की शक्ति कभी कम नहीं होनी चाहिए।
इस दिन का असली संदेश यही है कि हम एक-दूसरे की रक्षा करें, सम्मान दें और हमेशा साथ खड़े रहें।
रक्षा बंधन पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या बहनें दूसरी महिलाओं को राखी बाँध सकती हैं?
हाँ, रक्षा बंधन सुरक्षा और प्रेम का प्रतीक है, इसलिए बहनें किसी को भी राखी बाँध सकती हैं जिसका वे सम्मान करना चाहें।
प्रश्न 2: क्या रक्षा बंधन केवल हिंदुओं के लिए है?
नहीं, हालाँकि इसकी उत्पत्ति हिंदुओं से हुई है, फिर भी कई धर्मों के लोग इसे अलग-अलग तरीकों से मनाते हैं।
प्रश्न 3: क्या भारत के बाहर के लोग भी रक्षा बंधन मनाते हैं?
हाँ, दुनिया भर में भारतीय समुदाय इसे समान उत्साह के साथ मनाते हैं।
प्रश्न 4: क्या मैं किसी दोस्त को राखी बाँध सकती हूँ?
बिल्कुल! दोस्ती भी सुरक्षा और देखभाल का एक रूप है।
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